Top 101+Chai shayari चाय शायरी

हम भारतीय चाय से कितना प्यार करते हैं इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि यहां आपको हर गली-मोहल्ले में कुछ मिले न मिले, लेकिन चाय की दुकान जरूर मिल जाएगी। यहां तक कि किसी के घर भी चले जाओ तो आपको बिना चाय-नाश्ता के आने नहीं दिया जाता। अगर कभी चाय नसीब न हो, तो उन्हें खालीपन महसूस होता है। जब चाय की हमारी जिंदगी में इतनी अहमियत है, तो उस पर शायरी तो बनती ही है न। बस तो लेख में आगे पढ़िए सुबह-शाम की चाय पर बेहतरीन शायरी। chai shayari

 

 

Chai shayari

अमीरी और गरीबी नहीं देखती साहब,
ये चाय है सबको एक सा सुकून देती है !

 

सांवला है रंग थोड़ा कड़क मिजाज है,
सुनो तुम पसंद हो मुझे,
तुम्हारा चाय जैसा स्वाद है।

 

 

चाय के नशे का आलम तो कुछ,
यह है गालिब कोई राई भी दे,
तो अदरक वाली बोल देते हैं

 

 

 

जैसे शाम ढलती जा रही है,
तुम्हारे संग चाय की तलब,
बढ़ती जा रही है।

 

चाय शायरी

वो पल भी कोई पल है,
जिस पल तेरा एहसास ना हो,
वो चाय फिर चाय कैसी,
जिसमें तेरे होठों सी मिठास ना हो !

 

 

जितना उबलती है उतनी बेहतर लगती है,
ये चाय भी ना मुझे मेरे,
गुस्सेवाली बाबू जैसे लगती है !

 

लोगों की दोस्ती पर शक होने लगा है,
क्योंकि चाय पिने वाला आज कल,
कॉफी जो पिने लगा है !

 

 

जब ये लब चाय और तेरे लबों को छू लेते है,
तो हम एक पल में सदियां जी लेते है !!

 

 

उस चाय से भरे प्याले में बस कमी थी,
तो उसके इश्क करने वाले हाथों की !

 

 

चाय से हमेशा मोहब्बत है,
और हमेशा रहेगी,
चाहे पूरी दुनिया कॉफी के लिए मर मिटे !

 

 

मैं बन जाऊंचाय की पत्ती,
तुम बन जाओ शक्कर के दाने,
कोई तो मिलाएगा हमें चाय पीने के बहाने !

 

 

चाय जो बनाई उसने अपने हाथों से,
तो एक नशा सा छा गया,
उसके हाथों की चाय पीकर,
सच में मजा ही या गया !

 

 

वो पल भी कोई पल है
जिस पल तेरा एहसास ना हो
वो चाय फिर चाय कैसी
जिसमें तेरे होठों सी मिठास ना हो।

 

 

कुछ इस तरह से शक्कर को
बचा लिया करो, चाय जब पीओ हमें
जहन में बिठा लिया करो।

 

 

तुम्हारे हाथों की बनी चाय
के गर्म एहसासों की जरूरत है मुझे,
सुबह की सर्दी और तुम्हारी
जुदाई हमसे अब बर्दाश्त नही होती।

 

 

जब सुबह सुबह तेरे प्यार के नग्में को गुनगुनाता हूं
लब मुस्कुराते है जब चाय का कप उठाता हूं।

 

 

दोबारा गर्म की हुई चाय और
समझौता किया हुआ रिश्ता
दोनों में पहले जैसी
मिठास कभी नही आती।

 

 

ये गुलाबी ठंड के दिन,
तुम्हें याद करते करते
एक और चाय तुम्हारे बिन।

 

मैं बन जाऊंचाय की पत्ती,
तुम बन जाओ शक्कर के दाने,
कोई तो मिलाएगा हमें चाय पीने के बहाने

 

वो पल भी कोई पल है,
जिस पल तेरा एहसास ना हो,
वो चाय फिर चाय कैसी,
जिसमें तेरे होठों की मिठास ना हो।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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