Top 101+ Ramzan shayari रमजान शायरी

रमजान के पाक महीने में हर तरफ उत्सव का माहौल होता है। इस समय लोग एक-दूसरे को घर जाकर या फोन के माध्यम से बधाई देते रहते हैं। इस बार आप ये बधाइयां इन रमजान की शायरी के माध्यम से भी अपनों को दे सकते हैं Ramzan shayari

Ramzan shayari

माँ ना होगी तो वफा कौन करेगा,
यूँ ममता का हक अदा कौन करेगा,
या खुदा सलामत रखना सदा सबकी माँ को ,
वरना हमारी जिंदगी की दुआ कौन करेगा।

कभी-कभी आप सोच सकते हैं,
कि सब कुछ गलत हो रहा है,
फिर भी आपको यह एहसास नहीं है,
कि अल्लाह सब कुछ सीधा कर रहा है।

मेरी रहो के जो जुगनू है ,वो तेरे है,
तेरी रहो के जो अँधेरे है वो मेरे है,
छू सकता नहीं कोई गम तुझको क्यू के,
तुझपर दुआओं के जो पहरे है वो मेरे है।

रमजान शायरी

किसी को पैसो की चाहत,
किसी को प्यार की चाहत,
मेरे लिए मेरी माँ की दुआ काफी है।

इंसान का मुक़दर,
उतनि ह़ी बार बदलता हैं,
जितनीं बार वों अल्लाह से,
दुआ करता हैं।

मेरें अतीत के लिये अस्तगफ़िरुल्लाह,
मेरें वर्तमान के लिये अल्हमदुलिल्लाह,
मेरें भविष्य के लिये इंशाअल्लाह

हर दुआ में तेरा नाम याद आया,
हर धड़कन ने तुझे ही पुकारा,
दूर हो मुझसे कोई गिला नहीं,
फुर्सत मिले तो याद करना भूलना नहीं।

जुमा मुबारक शायरी

मोहब्बत का मतलब
हमने इतना ही जाना है
एक को चाहा है और
उसी को खुदा माना है..!

तेरी किस्मत मेरी किस्मत जैसी है
और तू मेरी परछाई है
ना जाने इस सच्चाई ने भी
कितनी तकलीफ दिलाई है..!

वो पहले सा कहीं मुझको
कोई मंज़र नहीं लगता
यहाँ लोगों को देखो अब ख़ुदा
का डर नहीं लगता

Love Ramzan shayari

कर लेता हूँ बर्दाश्त तेरा हर
दर्द इसी आस के साथ
की खुदा नूर भी बरसाता है
आज़माइशों के बाद !!

धीरे धीरे अपना बना रहा है कोई
प्यार के सुहाने सपने दिखा रहा है कोई
खुदा ये सच्ची मुहब्बत है य़ा चुना
लगा रहा है कोई

अपने परदे करने पर फक्र करना,
क्युकी दुनिया में किताबे बहुत है,
लेकिन गिलाफ सिर्फ क़ुरान मजीद पर है।

सब से पहले दुआ,
दुआ के बाद सब्र,
सब्र के बाद यक़ीन,
फिर आपका सफर बेहतरीन

दिल में एक जुस्तुजू जगी है,
हसरत भी जगी है जीने की,
दिल की तार जुडी है कहीं से,
और वो रौशनी है मदीने की।

फिक्र ऐ दुनिया कर के देखा,
फिक्र ऐ उक़्बा कर के देख,
सब को अपना कर के देखा,
रब को अपना कर के देख

Beautiful Ramzan Shayari

वो कच्चे मकानों के लिए
बारिश तूफान बन कर आई है
दुआ करो सबकी चाहत सलामत रहे

आसमान का चाँद तेरी बाहो में हो
तू जो चाहे तेरी राहो में हो
हर वो ख्वाब हो पूरा
जो तेरी आँखों में हो

रब से आपकी ख़ुशी मांगते है
दुआओ में आपकी हसी मांगते है
सोचते है क्या मांगे आपसे
चलो उम्र भर की मोहब्बत मांगते है

कई बार दुआ मांगी थी
तब मेरे नसीब ने तू आया है
कई राते गवाई थी तहज्जुद में
तब जेक तुझे किस्मत में लिखवाया है

दुआ में तुझसे क्या मांगू ए खुदा ?
बस इतनी सी हसरत है
सलामत रखना उसको
जिसके कदमो में मेरी जन्नत है

मालिक मेरे नमाज की चादर सँवार दो,
मदीने अपने बुला लो हमें गरीब नवाज,
बहुत उठाए अलम, रंजो सहे, गम भी सहे,
अपनी कमाली में छुपा लो हमें गरीब नवाज

attitude Ramzan shayari

इंसाफ़ करो, तफ़सीर यही
क्या वेदों के फ़रमन की है।
क्या सचमुच यह ख़ूंख़ारी है,
आला ख़सलत इंसान की है?

दिल दे आवाज़ और काश आपको खबर हो जाए,
हमारी दुआओं मे काश के इतना असर हो जाए,
रब से बस इतनी सी दुआ है मेरी कि,
आप जिसे चाहो वो आपका हमसफर हो जाए

तुम्हारे प्यार की दास्तान हमने अपने दिल मे लिखी है,
ना थोड़ी ना बहुत बे-हिसाब लिखी है,
किया करो कभी हमें भी अपनी दुआओं मे शामिल,
हमने अपनी हर एक साँस तुम्हारे नाम लिखी है

प्यार ने उसके ज़िंदगी से तालुक करवाया है,
तूफ़ानो से वो मुझको फिर लौटा के लाया है,
खुदा से बस इतनी ही दुआ करते हैं हम,
बुझ ना कभी ये दिया जो हमने जलाया है

मेरे होंठो पर जो आया बनके दुआ आया,
जिक्र मेरा उसके गालो पर बनके हया आया,
जब भी देखा मैने महकता हुआ गुलाब कहीं,
आँखों मे सदा उसका चेहरा बार-बार आया

मेरी ज़िंदगी तेरी पनाहो मे रहे
मर भी जाए तो तेरी बाहों मे रहे
तेरे लबो पे हमेशा मुस्कुराहट रहे
और तेरे सभी आँसू मेरी निगाहो मे रहे

Ramzan whatsapp status

हर बात मे उसकी याद रहती है,
मुझे हर वक़्त उसकी तलाश रहती है,
दोस्तो कुछ तुम भी दुआ करो,
सुना है दोस्तों की दुआ मे
फरिश्तों की फरियाद रहती है

उपरवाले का नूर आप पर इस कदर बरसे
जो भी तुम्हे देखे तुम्हारी चाहत को तरसे
ज़िंदगी में आपकी आए इतनी खुशियाँ
के उपरवाला भी तुमसे मिलने को तरसे

आखों मे तेरे आस हो तो मेरी हो
होठों पे तेरे प्यास हो तो मेरी हो
जब भी तुझे कभी कोई गम मिले,
तू खुश रहे आँखे उदास हो तो मेरी हो

उसको रब से इतनी बार माँगा है
के अब हम सिर्फ हाथ उठाते हैं
सवाल फरिश्ते खुद लिख देते हैं

अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे इंसान
के बस का काम नहीं
फ़ैज़ान-ए-मोहब्बत आम सही
इरफ़ान-ए-मोहब्बत आम नहीं !!

सब्र इतना रखो की इश्क़
बेहूदा ना बने
खुदा मेहबूब बन जाए पर
महबूब खुदा ना बने !!

एक मुद्दत के बाद हमने ये
जाना ऐ खुदा
इश्क तेरी ज़ात से सच्चा है
बाकी सब अफ़साने !!

दुआ रमजान शायरी

अल्फ़ाज़ों में क्या बयां करें अपनी
मोहब्बत के अफ़साने
हमारे में तो तुम ही हो तुम्हारे
दिल की खुदा जाने !!

उसने महबूब ही तो बदला है
फिर ताज्जुब कैसा
दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा
तक बदल देते हैं

बड़ी कशमकश है ए खुदा
थोड़ी रहमत कर दे
या तो ख्वाब ना दिखा
या मुकम्मल कर दे !

तू गुमराह कैसे हो गया अपने मुकाम से,
अब लौट आ इधर में अफ़ज़ल किताब हूँ,
फुरसत अगर मिले तो मुझे पड़ना ज़रूर,
मैं तेरी हर उलझनों का मुकम्मल जवाब हूँ।

तौहीद की अमानत सीनो में है हमारे,
आसान नहीं मिटाना नमो निशान हमारा।

Best Ramzan shayari

जो शख्स तुम्हे अल्लाह की तरफ ले जाये,
उससे मोहब्बत नहीं बल्कि बेशुमार मोहबत करे।

कुछ खो के बहुत कुछ पाया है,
गलत राह छोड़ कर मुसाफिर लौट आया है,
सुकून मिलता है सजदों में,
वक़्त लगा पर सही समाज आया है।

हर दुआ में तेरा नाम याद आया,
हर धड़कन ने तुझे ही पुकारा,
दूर हो मुझसे कोई गिला नहीं,
फुर्सत मिले तो याद करना भूलना नहीं।

मेरे अश्को से तू अपना दामन साफ कर,
अकेले तड़पता हूँ ऐ खुदा इन्साफ कर,
उनकी बेवफाई में कुछ राज छुपा है,
मेरे खुदा तू उनके हर गुनाह माफ़ कर।

चाक़ू ने इस्माईल को नही मारा,
आग़ इब्राहिम को नही लगी,
एक़ व्हेल ने यूनूस को नही ख़ाया,
समुद्र ने मूसा को नही डूबोया,
अल्लाह के साथ रहों और,
अल्लाह तुम्हारीं रक्षा क़रेगा।

मेरी औकात इस काबिल तो
नहीं कि मैं जन्नत में हूं
या रब दुआ बस इतनी सी है
कि मुझे जहन्नम से बचा लेना.

muslim shayari attitude

अफसोस इस बात का नही
कि धर्म का धंधा हो रहा है,
अफसोस तो इस बात का है
कि पढ़ा लिखा भी अंधा हो रहा है..

सख्ती थोड़ी लाजिमी है
पर पत्थर होना ठीक नहीं,
हिन्दू-मुस्लिम होना ठीक है
पर कट्टर होना ठीक नहीं।

दुआ करो हमारा भारत
फिर से महान बने,
हर हिन्दू विवेकानंद और
हर मुसलमान कलाम बने.

ना हिन्दू बुरा है
ना मुसलमान बुरा है
जो इन दोनों को लड़ाये
वो इंसान बुरा है.

गुलाम थे तो
हम सब हिन्दुस्तानी थे,
आजादी ने हमे
हिन्दू मुसलमान बना दिया

मंदिर हिन्दू का है,
मस्जिद मुस्लिम का है,
यह जो दंगों में खून बह रहा है
फिर वो खून किसका है.

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